श्री मत्य पंडित आचार्य श्री मुरली मनोहर शास्त्री जी का संक्षिप्त जीवन चरित्र।

मुल्तान नगर के सुप्रसिद्ध ज्योतिविद्याचार्य पंचनद विद्वत्परिषद के महामंत्री आचार्य श्री मत्य पंडित कमलनयन जी वैद्य वाचस्पति के सुपुत्र श्री मत्य पंडित आचार्य श्री मुरली मनोहर शास्त्री जी का प्राकट्य पौष शुक्ल पूर्णिमा विक्रमी संमवत १९८४ शुक्रवार तदनुसार ६ जनवरी, १९२८ को मुल्तान नगर मैं हुआ था। आपकी पूज्य माता जी श्रीमती भगवानदेवी परम वैष्णव थीं। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा-दीक्षा महाजन पाठशाला मैं पांचवी कक्षा तक हुई थी।

बाल्यकाल मैं ही प्रतुत्पन्न मति होने के कारण  पिताश्री ने सदाचर्याश्रम संस्कृत विद्यापीठ मैं प्रविष्टत करा दिया, इस विद्यालय में आप ने संस्कृत को प्रग्य परीक्षा उत्तम श्रेणी में पास की, पुनः आप ने सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय से शास्त्री परीक्षा प्रथम श्रेणी में पास की। तत्पचात्य आप ने कुछ समय के लिए अवैतनिक शिक्षा शास्त्री के रूप में कार्य प्रारम्भ किया।

इनके पिताश्री ने इनकी प्रागल्भ्य प्रतुत्पन्नमयी  बुद्धि का प्रभाव देखते हुए इन्हें अपने पास रख कर ज्योतिष, कर्मकांड, कथा भागवत एवं प्रवचन शैली का अभ्यास करा दिया।  आपश्री ने कुछ ही समय में समस्त विद्याओं क़ो सफलता पूर्वक ग्रहण कर लिया और छोटी अवस्था में धर्म प्रचार, व्याख्यान , भगवत चर्चा आदि देना आरम्भ कर दिया,

इनका प्राणिग्रहण संस्कार पूर्ण युवावस्था में मुल्तान शहर के जातिरत्न रेलवे में प्रधान श्रेणी की गॉर्ड श्री मत्य पंडित बिहारी लाल जी रंगा की सुपत्री श्रीमती प्रेमवती के साथ संपन्न हुआ। स्वस्थ दांपत्य जीवनयापन करते हुए तीन कन्याओं एवं एक बालक का जन्म हुआ।

देश विभाजन के बाद अपने माता पिता और भाईओं के साथ कुछ समय दिल्ली में निवास किया उसके उपरांत 1949 में आगरा में आ कर नागरी प्रचारणी में अध्यापन कार्य किया। आप स्वतंत्र विचारधारा के थे और अपने ही मन के धनी थे।  अपने ज्येष्ठ भ्राता स्वर्गीय श्री श्रवण कुमार जी शास्त्री के साथ मिलकर अपनी प्रखर बुद्धि के द्वारा ज्योतिष कर्मकांड का प्रचार करते हुए अपने पूज्य पिताश्री का नाम उज्जवल करते हुए “श्री कमलनयन ज्योतिष कार्यालय” की स्थापना की जो आज भी विद्यमान है।

आप अनेकों समाजसेवी संस्थाओं से जुड़े और विशेष कर मुल्तान शहर के होने के कारण आगरा में मुल्तानी भाईयों क़ो संगठित करके “मुल्तान सहायक सभा” नाम का संगठन बनाया जो आगे चल कर “मुल्तान सेवा समिति” के रूप में आज उन्नति के शिखर पर जनता जनार्दन की सेवा में लगा है। इसी  प्रागण में एक निशुल्क धर्माथ औषधालय से असाध्य रोगों का समुचित निदान होता है।  आपकी सेवाओं क़ो देखते हुए सेवा समिति नें आपको आजीवन  “प्रधानमंत्री’ का  पद पर सुशोभित किया।

इसके अलावा बहावलपुर सत्संग सभा’ की स्थापना की और उसके प्रधान पद पर रह कर धर्म का प्रचार किया ।  काफी समय तक विश्व हिन्दू परिषद् , आगरा” के अध्यक्ष पद क़ो सुशोभित किया। पुष्करणा समाज की उन्नति के लिए हमेशा कार्यरत रहे और समाज की प्रगति और उत्थान के लिए अथक प्रयास रत रहते  हुए सभा के  कई पदों पर सुशोभित रहेI

आपने छोटी अवस्था में अपने पूज्य गुरूवर षष्ठम पीठाधीश्वर वल्लभ वंशावत श्री श्री गोस्वामी श्री ब्रजरत्न लाल जी महाराज सूरत वालों से  दीक्षा प्राप्त करके पुष्टि सम्प्रदाय का प्रचार करते हुए आगरा स्तिथ श्री नाथ जी की प्रथम बैठक का जीर्णोद्वार करायाI  आपको अनेक भाषाओँ का ज्ञान था। माँ सरस्वती की अपार कृपा थी और आपकी जिव्हा पर सदा विराजमान रहती थीं । आप मृदु भाषी , परोपकारी, दूसरों के दुःख को अपना समझने वाले कई नवीन मंदिरों की स्थापना की.  आपके  हर सम्प्रदाय मैं  शिष्य थे।

आप चैत्र कृष्ण पक्ष सप्तमी सोमवार 24 मार्च 2003 को अपने  परिवार, विभिन्न समाज सेवी और राजनितिक संस्थाओं को छोड़ कर गोलोक गमन कर गए।   आपश्री के जाने से परिवार, आगरा के समाज, राजनितिक क्षेत्र और पुष्करणा समाज मैं एक बड़ा रिक्त स्थान हो गया है।

सा जातो येन जातेन याति वंश समुन्नतिम। परिवर्तिनी संसारे मृत: को जायते ।।

केवल उसी व्यक्ति का जीवन वास्तव मैं सार्थक होता है, जिसके जनम लेने से उसके वंश की उन्नति होती है ।  अन्यथा इस परिवर्तिनशील संसार मैं ऐसा कौन सा  प्राणी है जिसकी मृत्यु नहीं होते।

 

2 thoughts on “श्री मत्य पंडित आचार्य श्री मुरली मनोहर शास्त्री जी का संक्षिप्त जीवन चरित्र।”

    • परम आदरणीय परम पूज्य पिताजी – जय श्री कृष्ण ?
      आपके द्वारा दी गई शिक्षा पर हम चलते रहे, और अपना जीवन व्यतीत करे।

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