सर्वश्रेष्ठ व्रत एकादशी का माहात्म्य |

श्रीहरि को प्रसन्न करने के लिये एकादशी व्रत अवश्य करें । वैष्णवों हेतु यह सर्वश्रेष्ठ तो है ही परम आवश्यक भी है । द्वादशी तिथि संयुक्त एकादशी तिथि को ‘हरिवासर’ भी कहा गया है यानि हरि का दिन ।

चिन्तामणि-समा हृोषा अथवापि निधिः स्मृता । कल्पपादप-प्रेक्षा वा सर्ववेदोपमाथवा ।।

नारद पुराण में श्री वशिष्ठ जी कहते हैं कि यह (एकादशी) चिन्तामणि के समान (समस्त चिन्ताओं को हरण करने वाली) किसी निधि के समान (बहुमूल्य) कल्पतरु की भांति (सभी इच्छाओं को पूर्ण करने वाली) और सर्व वेदों की उपमा स्वरूप (सर्वोपरि-सर्वपूज्य-महत्त्वपूर्ण) है ।

गोविन्द-स्मरण नृणामेकादश्यामुपोषणम् । प्रायश्चित्तमिदं नूनं संसारोत्तार-कारकम् ।।

श्रीगोविन्द के स्मरणपूर्वक श्रीएकादशी के व्रत का पालन ही समस्त पापों का प्रायश्चित एवं संसार-सागर से पार होने का उपाय है ।

बालत्वे यौवने वापि वृद्धत्वे वा विशाम्बर । उपोष्यैकादशीं नूनं नैव प्राप्नोति दुर्गतिम् ।।

हे वैश्यों में श्रेष्ठ ! बाल्यावस्था, युवावस्था, वृद्धावस्था, किसी भी अवस्था में यदि एकादशी व्रत किया जाये तो व्रती कभी भी दुर्गति को प्राप्त नहीं होता है ।

वरं चाण्डालजातीय एकादश्युपवासकृत् । न तु विप्रश्चतुर्वेदी यो भुघ्क्ते हरिवासरे ।।

एकादशी-व्रत वाले दिन भोजन करने वाले चतुर्वेदी ब्राह्मण से चाण्डाल जाति का वह मनुष्य अधिक श्रेष्ठ है जो एकादशी व्रत करता है ।

ओंकारः सर्ववेदानां यथा चाद्यः प्रपूजितः । तथा सर्वव्रताना×च द्वादशीव्रतमुत्तमम् ।।

विष्णु पुराण में कहा है- जिस प्रकार समस्त वेदों स्वरूप¬कार प्रथम पूजित होता है, उसी प्रकार समस्त व्रतों में आदिव्रत द्वादशी व्रत उत्तम है ।

संकलन
जयगोपाल रंगा
कोषाध्यक्ष

1 thought on “सर्वश्रेष्ठ व्रत एकादशी का माहात्म्य |”

  • आदरणीय जय गोपाल जी, आपका अतिशय धन्यवाद जो अपने एकादशी जैसे महा लाभकारी व्रत की उचित विवेचना की और मार्गदर्शन किया
    आचार्य कमल भारद्धाज

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