In Memory of Late Pt. Devki Nandan Shastri Ji

Late Devki Nandan Ji Shastri Vyas

स्वर्गीय पं० श्री देवकी नन्दन शास्त्री जी
संक्षिप्त जीवन परिचय ( 1928 से 1995 )

दिल्‍ली सनातन धर्म जगत प्रसिद्ध नेता एवं पश्चिमी क्षेत्र के लोकप्रिय सामाजिक एवं राजनीतिक व्यक्तित्व स्वर्गीय पं. देवकी नन्दन शास्त्री का जन्म 9 दिसम्बर 1928 को मुलतान नगर (पाकिस्तान) पुष्करणा ब्राह्मण परिवार में हुआ था। सनातन संस्कार तथा संस्कृत की शिक्षा आपको विरासत में मिली। शिक्षा के क्षेत्र में श्री शास्त्री जी ने अपना विद्यालय तिलक नगर में स्थापित कर उल्लेखनीय योगदान दिया तथा आज इनके हजारों शिष्य ऊँचे पदों पर आसीन हैं।

तिलक नगर की सनातन धर्म सभा के श्री शास्त्री जी अनेक वर्षो तक प्रधान रहे और इस मन्दिर को सेवा तथा संस्कारों का मुख्य केन्द्र बनाने में सफल रहे। शास्त्री जी के सेवा को देखते हुए सनातनधर्म मन्दिर सभा ने उनको आजीवन चैयरमेन नियुक्त किया था। दिल्ली सनातन धर्म प्रतिनिधि सभा के श्री शास्त्री जी उप-प्रधान थे, तथा सनातन धर्म पर होने वाले कुप्रचार के विरुद्ध संघर्ष में सर्वदा अग्रणी रहे। सभा ने मन्दिर में शास्त्री जी की प्रतिमा भी स्थापित करवाई है।

स्वर्गीय देवकी नन्दन शास्त्री एक बहुमुखी प्रतिभा के व्यक्ति थे। केन्द्रीय पुष्करणा ब्राह्मण सभा के अनेक वर्षों तक उप-प्रधान तथा प्रधान रहे। पश्चिमी दिल्‍ली व्यापार मण्डल के भी संस्थापक अध्यक्ष थे। उनकी दिलेरी, साहस तथा संघर्ष के कारण तिलक नगर निवासी शास्त्री जी को ‘शेर’ कहते थे। लोगों पर अन्याय के खिलाफ स्वर्गीय शास्त्री जी सबसे पहले आवाज उठाते थे। भारतीय जनसंघ, राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ तथा बाद में भारतीय जनता पार्टी में सक्रिय भूमिका निभाते रहे।

आपातकाल में श्री शास्त्री जी ।9 महीने तक जेल में रहे। अन्तिम कुछ वर्षों में स्वास्थ्य ठीक न होते भी कार्य करते रहे। श्री सनातन धर्म मन्दिर तिलक नगर का निमार्णधीन मुख्य द्वार 7 मंजिला बनाने का संकल्प किया था और अब वह स्वपन साकार हो गया है।

स्वर्गीय पं0 देवकी नन्दन शास्त्री जी की समाज के प्रति सेवाओं को देखते हुये, दिल्‍ली नगर निगम ने श्री सनातनधर्म मन्दिर (तिलक नगर) के सामने वाली सड़क का नाम “ देवकी नन्दन शास्त्री मार्ग” रख दिया है। तिलक नगर क्षेत्र के निवासी इस कार्य के लिए दिल्ली नगर निगम का, विशेषकर श्रीमति शकुन्तला आर्य, पूर्व महापौर का आभार व्यक्त करते हैं।

-अजय कुमार व्यास
(सुपुत्र)

 

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