In Memory of Late Shri Dina Nath Ranga Ji

Late Shri Dina Nath Ranga Ji
Late Shri Dina Nath Ranga Ji

श्री दीनानाथ रंगा जी का जन्म अविभाज्य भारत के मुलतान शहर में 02 दिसम्बर, 1946 को हुआ था. आपके पिताश्री पं• श्री आत्माराम जी कुलीन रंगावंश के विद्वान एवं परम सनातनी थे. आपकी माताश्री श्रीमती नारायण देवी गज्जावंश के अति विद्वान एवं प्रसिद्ध परिवार की सुपुत्री थीं. आपश्री के जन्म से 8 महीने बाद ही भारत का विभाजन हो गया. विभाजन की अति विषम त्रासदी झेलते हुऐ आपके माता पिता दिल्ली में विस्थापित हो कर रहने लगे.

सुसंस्कारित माता-पिता ने स्नेह, वात्सल्य एवं सुसंस्कारों से आपका लालन पालन किया. विद्वान कुल एवं सुसंकारों से परिपूर्ण आपकी माताश्री ने आपको बाल्यकाल से ही उच्च संस्कार दिये. आरम्भिक शिक्षा के बाद आपने उच्च शिक्षा दिल्ली के देशबन्धु कालेज से प्राप्त की. अति मर्मज्ञ एवं कुशाग्र बुद्धि के कारण आपश्री को भारत सरकार के अति महत्वपूर्ण उपक्रम एन टी पी सी में नियुक्ति मिल गई. आपश्री ने अपने परिश्रम, लगन एवं कुशलता से इसी उपक्रम में सफलता पूर्वक कार्य किया और सन् 2005 में उच्चपद से सेवा निवृत्त हुऐ.

बाल्यकाल से ही संस्कारित जीवन होने और धार्मिक क्षेत्र में आपश्री की अतिशय रूचि को देखते हुऐ विद्वत जगत में अपनी विद्वत्ता से प्रसिद्ध आपके द्वय मामाश्री श्री नीलकंठ जी शास्त्री एवं * श्री देवकीनन्दन जी शास्त्री* ने गुरूतुल्य मार्गदर्शन किया. दोनों मामाश्री के आशीर्वाद और सान्निध्य में आपश्री ने ज्योतिष एवं कर्मकांड में शिक्षा प्राप्त कर दक्षता प्राप्त की. आपश्री के सुसंस्कारों का प्रत्यक्ष उदाहरण है कि आपने अपने से 16 वर्ष छोटी बहन का अनुगमन एवं कर्तव्यपालन पुत्रीवत किया.

 श्री दीनानाथ जी रंगा का विवाह पुरोहित वंश की सुसंस्कारित पुत्री श्रीमती उषा जी के साथ सम्पन्न हुआ और उनके साथ सुखमय जीवन व्यतीत करते हुए एक पुत्री और दो पुत्रों के पिता बने. श्री रंगा जी एवं श्रीमती उषा रंगा जी ने अपने बच्चों को समुचित शिक्षा के साथ-साथ अपने विद्वानों से पूर्ण परिवार के उच्च संस्कारों से भी शिक्षित किया. आपकी पुत्री का विवाह समाज के एक अन्य विद्वत्त परिवार आचार्य वंश के श्री बृजमोहन जी आचार्य एवं श्रीमती राज आचार्य के सुशिक्षित पुत्र चिरायुष्मान संजय आचार्य के साथ सम्पन्न हुआ. आपके पुत्र श्री हेमन्त जी रंगा प्राइवेट सैक्टर में कार्य करते हैं और श्री सुमन्त जी रंगा ज्योतिष में पारंगत हैं. श्री सुमन्त रंगा जी ज्योतिष एवं कर्मकांड में लोगों को शिक्षित करने का संस्थान चलाते हैं.

श्री दीनानाथ जी रंगा का कई उच्च कोटि के कथावाचकों और विद्वानों से परिचय था. आपश्री पर राष्ट्रीय संत एवं महान रामकथा के प्रबल वक्ता परम पूज्य आदरणीय श्री मोरारी बापू जी एवं कथा, प्रवचन में श्रेष्ठ श्री रमेश जी ओझा का विशेष स्नेह था. आपश्री स्वयं मधुर वाणी स्वामी थे. समाज सेवा एवं सत्य सनातन धर्म का प्रबल प्रचार एवं प्रसार करते थे. आपश्री ने लाजपतनगर, दिल्ली में एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया जो आज जनता को समर्पित है. आपने अनेक पत्र पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया है. पुष्करणा समाज के लिए अनेकों बार बस द्वारा द्वारा कई तीर्थ यात्राओं का प्रबन्ध किया. आपश्री का जीवन का एक ही ध्येय था सनातन धर्म एवं पुष्करणा समाज का उत्थान एवं सेवा.

आपश्री प्रबल मानसिक स्थिरता के स्वामी थे. जीवन के कुछ वर्ष किडनी रोग से पीड़ित रहे परन्तु कभी भी विचलित नहीं हुऐ अपने रोग से किसी को भी तनिक भी असुविधा नहीं होने दी. जीवन के अंतिम क्षणों में श्रीमद् भागवत महापुराण का श्रवण एवं स्मरण करते करते देह का त्याग कर गोलोकगमन गमन कर गये.
केन्द्रीय पुष्करणा ब्राह्मण सभा अपने समाज के ऐसे महान व्यक्तित्व को शत् शत् नमन करते हुऐ श्रद्धांजलि अर्पित करती है..ॐ कल्याणमस्तु.

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