In Memory of Late Shri Harbhagwan Joshi Ji

Late Shri Harbhagwan Joshi Ji
Late Shri Harbhagwan Joshi Ji

केन्द्रीय पुष्करणा ब्राह्मण सभा (रजि•) अपने समाज के कई प्रबुद्ध विद्वानों और महापुरुषों को स्मरण करने में प्रयासरत रहती है जिन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में कई उच्च मापदंड स्थापित कर आने वाली पीढ़ी के लिए उदाहरण स्थापित किये. प्रस्तुत है बैंकिंग क्षेत्र में स्वतंत्रता से पहले से ही अपना वर्चस्व स्थापित करने वाले श्रीमान् श्री हरभगवान जोशी जी का सादा और समर्पित जीवन परिचय.

श्री जोशी जी का जन्म 28 दिसम्बर को अविभाज्य भारत के बहावलपुर शहर में हुआ था. पिता श्री ब्रजकिशोर जी जोशी उस समय के उत्तर भारत के प्रतिष्ठित स्कूल Church Mission High School में उच्च शिक्षक के पद पर कार्यरत थे. परिवार में चार संतानों के बाद अकस्मात पूज्य माताश्री का साया हट गया. परिवार में सबसे बडे होने के नाते पिताश्री के साथ परिवार को माताश्री के अभाव को अनुभव नहीं होने दिया और सभी भाई बहनों का उचित पालन-पोषण किया. मैट्रिक की शिक्षा प्राप्त करते ही एवं कुशाग्र बुद्धि के कारण आपश्री की तत्कालीन ब्रिटिश साम्राज्य के प्रतिष्ठित बैंक Imperial Bank में नौकरी लग गई. भारत विभाजन के मात्र छह महीने पूर्व आपका विवाह मुल्तान के सुशिक्षित एवं विद्वत परिवार श्री लद्धूलाल जी व्यास एवं श्रीमती जेसीबाई जी की सुशिक्षित एवं व्यवहारकुशल पुत्री श्रीमती शीला व्यास जी के साथ सम्पन्न हुआ.

भारत विभाजन की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद और कई त्रासदियाँ झेलने के बाद पहले अमृतसर फिर अलवर प्रवास करने के बाद आप सपरिवार लखनऊ में रहने लगे. पिताश्री श्री बृजकिशोर जी के अथक प्रयासों से हज़रतगंज, लखनऊ की Imperial Bank में पुन: नौकरी मिल गई. बाद में बैंक का नाम परिवर्तित करके State Bank of India कर दिया गया. लखनऊ निवास में आपका परिवार स्थापित हो गया और आप पाँच पुत्रों एवं एक पुत्री के पिता बने.

बैंक में कार्यरत रहते देश के कई शहरों फ़ैज़ाबाद, तुलसीपुर, कुण्डा एवं चित्रकूट में स्थानांतरित होते रहे और सर्वत्र अपने अनुभव एवं कार्यकुशलता से लोकप्रिय रहे. 1972 में स्थानांतरित हो कर कानपुर में आये और यहीं कृष्णानगर में अपना निवास बना कर बैंक से Senior Manager के पद से रिटायर हुए. आपकी सभी संतानों ने उच्च शिक्षा प्राप्त की और सभी के प्रतिष्ठित घरों में संबंध हुए.

आपके पुत्र श्री धनेश जी जोशी पत्रकारिता के क्षेत्र में रहे और लोकप्रिय अख़बार दैनिक जागरण के चंडीगढ़, हिमाचल एवं पंजाब क्षेत्र के Senior General Manager के पद पर रह कर अख़बार को और लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाई.

श्री हरभगवान जी जोशी का अत्यन्त अनुशासित जीवन था जिससे आपश्री का व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली था. अनुशासित जीवन के साथ ही आप अति विनोदी स्वभाव के भी थे. फ़िल्मों और संगीत के ना केवल अनुरागी थे अपितु बहुधा स्वयं भी अपने परिवार एवं मित्रों को गा कर सुनाते थे. अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए नियमित व्यायाम करते थे. श्री जोशी जी अनुशासित जीवन के साथ स्वच्छता पर विशेष ध्यान देते थे. नित्य नये प्रयोग करने पर विश्वास करते थे. 50 वर्ष की उम्र में राजदूत मोटरसाइकिल ख़रीदा और फिर उसे चलाना भी सीखा. सेवानिवृत होने के बाद अपने परिवार अपने पौत्र और पौत्रियों के साथ समय व्यतीत करते थे. आपश्री 09 दिसम्बर, 1994 को अपने भरपूर परिवार को छोड़ कर गोलोकधाम प्रवास कर गये..केन्द्रीय पुष्करणा ब्राह्मण सभा अपने समाज के प्रभुत्व व्यक्तित्व श्री हरभगवान जोशी जी सादर श्रद्धापूर्ण नमन करता है..ॐ शुभ कल्याणमस्तु

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