Pushkarna Gaurav – Shri Bhushan Lal Ji Harsh

?? पुष्करणा गौरव ??

Shri Bhushan Lal Ji Harsh
Shri Bhushan Lal Ji Harsh

केन्द्रीय पुष्करणा ब्राह्मण सभा (रजि•) अपने पुष्करणा समाज के एक अन्य ”भूषण” जिन्होंने ना सिर्फ़ जयपुर अपितु समस्त राजस्थान में अपनी शिक्षा, सौम्यता, समाज के प्रति समर्पण और आध्यात्मिक ज्ञान से समाज पर एक अमिट प्रभाव स्थापित किया है. प्रस्तुत है जयपुर के श्री मण्डलेश्वर शिव मंदिर ट्रस्ट के एक संस्थापक सदस्य एवं भूतपूर्व सचिव श्री भूषण लाल जी हर्ष का संक्षिप्त जीवन परिचय.

पुष्करणा समाज आदि काल से ही बहुमूल्य रत्नो से दीप्तिमान रहा है। उसी श्रृंखला को पूर्ववत हमारी वर्तमान पीढ़ी अनवरत बढ़ा रही है। यह श्रीनाथ जी की असीम अनुकंपा ही है। उन्ही रत्नों में कौस्तुभ मणि सदृश्य प्रसिद्ध समाजसेवी श्री भूषण लाल जी हर्ष का जन्म अविभाज्य भारत के शहर डेरा इस्माइल खां में दिनांक 30 अक्टूबर सन् 1939 को पुष्करणा समाज के रत्न एवं प्रतिष्ठित प्रातः स्मरणीय पूज्यनीय कर्मकांड मणि गोलोकधाम वासी श्री मोतीलाल जी हर्ष तथा श्रद्धेय श्रीमती सुशीला देवी हर्ष के यहां हुआ। माता पिता ने इन्हें मोती सदृश्य कांतिमय तथा शील स्वभाव वाला बाल्यकाल से ही बनाया। अंतर्निहित सद्गुणों को इन्होंने उम्र के साथ-साथ उत्तरोत्तर विकसित किया।

आपके पितामह प्रसिद्ध समाजसेवी श्रीमान गोकुलचंद्र हर्ष एवं पितामही श्रीमती निहाली बाई (रिझको )हर्ष थी । जिन्होंने जीवन पर्यंत धर्ममयजीवन जीते हुए धार्मिक तथा पारंपरिक रीति-रिवाजों को हस्तांतरित किया। आपके नाना जी प्रसिद्ध वैध श्री नेता लाल जी कल्ला और नानी श्रीमती किशनी देवी कल्ला का भी पूर्ण आशीर्वाद रहा । आपकी मेधावी बुद्धि ने ही आपको विद्याध्ययन के पथ पर बढाते हुए सफलता के शिखर पर पहुंचा दिया। आप अपनी लगन एवं परिश्रम से स्नातक (B.A) तत्पश्चात साहित्य रत्न की उपाधि प्राप्त की। अपने कानूनी शिक्षा प्राप्त कर L.L.B की डिग्री प्राप्त करने के बाद Accountant General Office Rajasthan मैं उच्च पद पर आसीन हुए। श्रद्धा और लगन के साथ आपने अपना सेवा कार्य कर ससम्मान सेवानिवृत्त हुए। शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ आपकी खेलों में भी विशेष रुचि थी। आपने राजस्थान से फुटबॉल एवं वॉलीबॉल खेलों में राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में प्रतिनिधित्व किया है।

आपका व्यक्तित्व शशि सम शीतल , रवि सम उज्जवल तथा बादल की तरह रसमय प्रतीत होता है। आपका विवाह पठानकोट निवासी संस्कृत के प्रकांड विद्वान प्रातः स्मरणीय श्री गोविंद कांत जी शास्त्री की सर्वगुण संपन्न सुकन्या श्रीमती सावित्री देवी से हुआ है। गृहस्थ जीवन कदम रखते हुए पारिवारिक जिम्मेदारी तथा समाज के उत्थान के लिए आप सदा ही कटिबद्ध रहे हैं। अपने पिताश्री के बताए गए मार्ग पर चलतेहुए उनके संस्कारों का अनुसरण करते हुए आपने अपनी कुल की यशोध्वजा को और अधिक ऊंचाई पर ले जाने का सुंदर कार्य किया है। माता पिता का आशीर्वाद ही इस बात का द्योतक है कि आपने अल्प आयु में ही संपूर्ण पुष्करणा समाज में ही नहीं अपितु अन्य सभी समाजों में भी अपना एक विशेष स्थान बनाया है।

आपने जयपुर पुष्करणा समाज के साथ श्री पुष्टिकर ब्राह्मण सभा के गठन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सभा के वरिष्ठ सदस्यों के साथ आप युवा उम्र में ही पूर्ण मनोयोग के साथ जुड़े और अनवरत आज भी संरक्षक की भूमिका निभा रहे है। पद पर आसीन रहते हुए आपने लोक कल्याणार्थ कई उल्लेखनीय कार्य किये है। जिसने जयपुर की महान विभूतियों के साथ श्री मंडलेश्वर शिव मंदिर ट्रस्ट का नव निर्माण कराया

आपश्री ने पुष्करणा समाज के उत्थान और समाज में जागरूकता का संचार करने के लिए पुष्करणा समाज अंतराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जिसमें समाज के युवा बालक/बालिकाओं ने समाज की कुरीतियाँ को दूर कर एक उत्तम समाज बनाने के लिए संकल्प लिया.

आपश्री के सत्य संकल्प से पुष्टिकर ब्राह्मण सभा ने तीन विशाल 108 श्रीमद्भागवत महापुराण का पारायण और तीन बार श्री भाटिया समाज, जयपुर के सहयोग से पारायण किया जिससे जयपुर में धर्म, आध्यात्म और सहयोग की गंगा का अवतरण हुआ.

पुष्टिकर समाज एवं भाटिया समाज आपके इस समाज हित एवं पावन कार्य के लिए सदा ऋणी रहेगा.

आपकी प्रवचन की अद्भुत, ज्ञानात्मक शैली से प्रभावित हो कर कई बडे बडे संत, महात्मा, सामाजिक संस्थायें एवं राजनीतिक पार्टियाँ समय समय पर आपश्री का प्रवचन श्रवण करने के लिए आमंत्रित करते हैं. हम समस्त पुष्करणा समाज आपश्री के समाज के प्रति योगदान से कृतज्ञ हैं और गौरवान्वित अनुभव करते हैं.

केन्द्रीय पुष्करणा ब्राह्मण सभा के समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी के सदस्य श्री भूषण लाल जी हर्ष के स्वस्थ दीर्घायु जीवन की मंगल कामना करती है…शुभ कल्याणमस्तु??

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