Pushkarna Gaurav – Shri Ratna Kumar Shastri Ji Kalla (Ratna)

?? पुष्करणा गौरव ??

Shri Ratna Kumar Shastri Ji Kalla (Ratna)
Shri Ratna Kumar Shastri Ji Kalla (Ratna)

केन्द्रीय पुष्करणा ब्राह्मण सभा (रजि•) आज अपने आप गौरवान्वित अनुभव कर रही है जो अपने समाज के एक ऐसे रत्न को पुष्करणा गौरव से सम्मानित कर रही है जिन्होंने ना सिर्फ राजस्थान में अपितु सम्पूर्ण भारत में अपनी कविताओं एवं ग़ज़लों के माध्यम से अभूतपूर्व लोकप्रियता एवं सम्मान प्राप्त किया है. प्रस्तुत है पुष्करणा समाज के कविरत्न आदरणीय श्री रत्नकुमार जी शास्त्री कल्ला ‘रत्न’ का सफलताओं से परिपूर्ण जीवन परिचय.

पुष्करणा समाज एक ऐसा विद्वत्समाज है जिसमें एक नहीं अनेक शिक्षाविद, समाजसेवी, संस्कृत एवं ज्योतिष शास्त्र के प्रकांड विद्वान और अन्य कई क्षेत्रों में अभूतपूर्व सफलता एवं सम्मान अर्जित करने वाले महानुभावों, मातृशक्ति का जन्म हुआ है. ऐसे ही हमारे समाज का नाम उज्जवल करने वाले हैं कविराज आदरणीय श्री रत्नकुमार जी शास्त्री कल्ला ‘रत्न’ जिनका जन्म अविभाज्य भारत के शहर डेरा इस्माइल खां में 12 जुलाई, 1937 को परम तेजस्वी विद्वान स्व• श्री नारायण दत्त जी शास्त्री कल्ला के यहाँ हुआ. आपकी माताश्री परम वैष्णव श्रीमती कोकिला देवी ने आपश्री को सात्विकता ओर वैष्णवता के गुण प्रदान किये. आपश्री का विवाह स्व• श्री शिवकुमार व्यास जी एवं स्व• श्रीमती भगवानी बाई की सुपुत्री परम भगवदीया एवं परम वैष्णव स्व• श्रीमती कमला देवी के साथ हुआ जिन्होंने जीवन पर्यन्त श्री शास्त्री का हर सुख-दुख में साथ दिया.

श्री रत्नकुमार जी शास्त्री कल्ला ‘रत्न’ ने अपनी आरम्भिक शिक्षा के बाद विशारद तत्पश्चात शास्त्री की शिक्षा प्राप्त कर शिक्षक पद पर नियुक्त हुऐ और वरिष्ठ शिक्षक पद से सेवा निवृत हुऐ. आपके सात्विक संस्कारों के कारण आपने समाज के सभी वर्ग के बालकों कों निःशुल्क विधा दान दिया और आज आपके द्वारा शिक्षित कई बालक उच्च पदों पर आसीन हैं. आपश्री को वैसे तो बाल्यकाल से ही कविता लेखन में गहन रूचि थी लेकिन आपने अधिकारिक रूप से रत्न उपनाम से कविता लेखन का कार्य 1950 से आरम्भ किया.

अधिकांशत: सभी राष्ट्रीय पर्वों के अवसर पर आपश्री के द्वारा लिखे देशभक्ति के गीतों को संगीतबद्ध कर आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रसारित किया जाता है. आपश्री की उपलब्धियों को देखते हुऐ कई राजनीतिक, सामाजिक एवं साहित्यिक संस्थाओं ने विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया, उनमें से कुछ सम्मान निम्न हैं:

  • राजस्थान के तत्कालीन शिक्षामंत्री श्री घनश्याम तिवारी जी द्वारा प्रदेश के संस्कृत के 74 प्रकांड विद्वानों में से चयनित हो कर “सर्वश्रेष्ठ अध्यापक” का सम्मान प्राप्त करना.
  • आपश्री को राजस्थान की सर्वोच्च साहित्यिक संस्था “काव्यलोक” ने अति विशिष्ट “मानस मराल” उपाधि और सम्मान से सुशोभित किया.
  • राजस्थान की एक अन्य प्रतिष्ठित काव्य संस्था “जय साहित्य संसद” ने आपश्री की अद्भुत काव्य प्रतिभा को देखते हुऐ संस्था के महत्वपूर्ण “करतार सिंह लक्ष्मण सिंह गुर्जर” सम्मान से सम्मानित किया.
  • पावटा, अलवर की “जीवनधारा संस्था” ने आपकी काव्य प्रतिभा को देखते हुऐ “विशेष प्रशस्ति पत्र” से सम्मानित किया.
  • प्रसिद्ध गीतकार श्री गोपालदास “नीरज” के साथ लोकप्रिय कार्यक्रम “एक शाम नीरज के साथ” में मंच साझा कर उनके आशीर्वाद के कृपापात्र बने.
  • राजस्थान के अग्रवाल कालेज के अखिल भारतीय कवि सम्मेलन में अनेक प्रसिद्ध कवियों और शायरों के बीच अपनी दमदार ग़ज़लों और सुमधुर कविताओं से दर्शकों को प्रभावित कर “सोने के बटन” के रूप में स्वर्ण पदक प्राप्त किया |

आपश्री द्वारा लिखित एक देशभक्ति के गीत जिसको अन्तर्राज्यीय मंच पर प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ था, उस गीत की एक प्रति और पुरस्कार राशि को “प्रधानमंत्री राष्ट्रीय सुरक्षा कोष” को प्रदान किया जिससे प्रभावित हो कर प्रधानमंत्री कार्यालय से प्रशस्ति पत्र प्राप्त हुआ.

आपश्री के काव्य संग्रह का कई सरकारी एवं ग़ैर सरकारी पुस्तकों में प्रकाशन हुआ.
आप अनगिनत बार कई शिक्षण संस्थाओं एवं प्रतियोगिता मंच पर मुख्य निर्णायक पद पर सुशोभित रहने का सौभाग्य प्राप्त हुआ.

आपने असंख्य गोष्ठियाँ, कवि सम्मेलन, साहित्यिक सम्मेलन एवं मुशायरों में भाग ले कर आयोजकों एवं श्रोताओं का ह्रदय जीत कर प्रशंसा प्राप्त की है. हमारे समाज में एक सुनहरा अवसर होता था जब विवाह आदि माँगलिक अवसरों पर “सेहरा पढ़ना” ना सिर्फ एक परम्परा थी अपितु विवाह पर बडी प्रतिष्ठा का मापदंड भी होता था. श्री शास्त्री जी कई मित्रों और संबंधियों के आग्रह पर सेहरा लेखन-गायन कर अपनी आत्मीयता ओर स्नेह का परिचय देते थे.

अहमदाबाद से जब पुष्टिकर सम्प्रदाय के परम श्रद्धेय आचार्य श्री वल्लभ राय जी का जयपुर में पधरापन हुआ तब आपश्री ने उनके स्वागत में “अभिनंदन गीत” सुना कर भावविभोर कर दिया, आचार्यश्री ने अपने कर कमलों से दुशाला ओढ़ा कर सम्मान किया.

आपको आकाशवाणी का अनुबंधित कवि होने का गौरव प्राप्त है. आपने ही आकाशवाणी के नियमित कार्यक्रम गुलिस्ता का शीर्षक गीत हर रंग के फूलों से सज़ा है यह गुलिस्ताँ, हर फूल में उर्दू ए चमन महक रहा है की रचना करने का सौभाग्य प्राप्त है.

लगभग आठ वर्षों तक जयपुर पुष्टिकर ब्राह्मण समाज सभा के अध्यक्ष पद पर आसीन रहे। इस दौरान समाज और धर्म के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए सभा के सदस्यों के सहयोग से परम श्रद्धेय परमादरणीय कथावाचक श्री श्री सुरेश जी महाराज के मुखारविंद से श्री मद्भागवत कथा का आयोजन १०८ विद्वान ब्राह्मणों से मूल पाठ के साथ आयोजित करवाने का पुण्य कार्य भी किया |

साथ ही महाप्रभु परम पूज्य नित स्मरणीय श्री मद् वल्लभाचार्य जी महाराज एवं परम श्रद्धेय प्रातः स्मरणीय साक्षात आचार्य स्वरूप श्रीविठ्ठलनाथ गौंसाई जी की शोभायात्रा का सुंदर आयोजन उत्सव रूप में मनाए गए।

आदरणीय शास्त्री जी आजकल संस्कृत काव्य संग्रह की रचना में सलंग्न हैं.

केन्द्रीय पुष्करणा ब्राह्मण सभा (रजि•) के समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी के सदस्य श्री रत्नकुमार जी शास्त्री कल्ला ‘रत्न’ की दीर्घायु, शतायु होने की कामना करते हैं जिससे पुष्करणा समाज उनके आशीर्वाद का सदा लाभ उठाता रहे…ॐ शुभ कल्याणमस्तु ??

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